PM Modi Diwali 2026: बस्तर में जवानों संग पीएम मोदी की खास दिवाली, शहीदों को किया नमन, आदिवासी गीतों पर थिरके सुरक्षाबल

Bastar News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस बार बस्तर की दिवाली का नजारा कुछ खास रहा। जहां कभी नक्सलवाद के कारण गोलियों और बारूद की गूंज सुनाई देती थी, वहां दिवाली के मौके पर आदिवासी गीतों, संगीत और उत्सव का माहौल देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने जवानों के साथ समय बिताया, शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और आदिवासी धुनों पर जवानों के साथ थिरकते नजर आए। उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस, त्याग और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवान उनके परिवार का हिस्सा हैं।
करनपुर के CoBRA ऑपरेशंस बेस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बस्तर के करनपुर स्थित CoBRA (कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) ऑपरेशंस बेस पहुंचे। यह कैंप बस्तर और अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के जवानों से मुलाकात की और उनके साथ दिवाली की खुशियां साझा कीं।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कैंप परिसर में बने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए CRPF जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के बलिदान को याद किया।

आदिवासी गीतों पर जवानों के साथ थिरके पीएम मोदी
बस्तर में दिवाली समारोह के दौरान उत्साह और उमंग का माहौल रहा। सुरक्षा बलों के जवानों ने पारंपरिक आदिवासी गीतों पर नृत्य किया। प्रधानमंत्री मोदी भी इस उत्सव में शामिल हुए और जवानों के साथ आदिवासी धुनों पर थिरकते नजर आए।
जवानों ने प्रधानमंत्री के साथ भारत माता की जय के नारे लगाए। इस दौरान मिठाइयां बांटी गईं और एक-दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं दी गईं। प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से जवानों को मिठाई खिलाई और उनके साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।
‘हर जवान मेरे परिवार का हिस्सा’
सुरक्षा बलों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात जवान हों या देश के भीतर शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाले सुरक्षाकर्मी, सभी उनके परिवार का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि वह बस्तर की धरती पर जवानों के बीच दिवाली मनाने और उनके बलिदान, समर्पण तथा सेवाभाव के लिए देश की ओर से आभार व्यक्त करने आए हैं। प्रधानमंत्री ने CRPF, CoBRA, BSF, ITBP, SSB, IRB और राज्य पुलिस के जवानों सहित बस्तर फाइटर्स तथा महिला सुरक्षाकर्मियों के योगदान की सराहना की।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जवानों के योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दिवाली 2026 देश के लिए विशेष महत्व रखती है। उनके अनुसार, यह दशकों से चली आ रही नक्सलवाद और माओवादी हिंसा के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद पहली दिवाली है।
उन्होंने कहा कि देश के हर जिले से नक्सलवाद का प्रभाव समाप्त हो चुका है और करोड़ों लोगों ने नक्सली हिंसा के भय से मुक्ति पाई है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, प्रतिबद्धता और बलिदान को दिया।
उन्होंने कहा कि बस्तर की धरती, जो कभी नक्सलवाद से प्रभावित थी, अब शांति और विकास की नई यात्रा की ओर बढ़ रही है। जवानों के त्याग और समर्पण ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बस्तर में अब विकास की नई संभावनाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक बस्तर के विकास में बाधा बना रहा। हिंसा और असुरक्षा के कारण क्षेत्र के कई हिस्सों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार प्रभावित हुआ।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा की बेहतर स्थिति बनने के साथ अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, संचार, पर्यटन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, बस्तर में शांति और विकास को आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षा बलों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों को भरोसा दिलाया कि देश उनके त्याग और सेवाभाव को हमेशा याद रखेगा।
जवानों के साथ दिवाली मनाने की परंपरा को रखा जारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल दिवाली के अवसर पर देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के बीच पहुंचकर त्योहार मनाते रहे हैं। इस बार उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर को चुना। उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और विकास को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है।
बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाकर प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। शहीदों को श्रद्धांजलि, जवानों के साथ मिठाइयां बांटना और आदिवासी गीतों पर नृत्य करना इस कार्यक्रम के खास पल रहे।
इस तरह बस्तर में दिवाली का यह आयोजन सुरक्षा बलों के बलिदान, स्थानीय आदिवासी संस्कृति और क्षेत्र में शांति एवं विकास की उम्मीदों को एक साथ सामने लाया।

