132 kidnapping cases in 24 hours रायपुर के 32 थानों में 24 घंटे में 132 अपहरण के मामले दर्ज, कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने बताई पूरी वजह

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महज 24 घंटे के भीतर 132 अपहरण के मामले दर्ज किए जाने की खबर सामने आने के बाद हलचल मच गई। इन मामलों में रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के 92 और ग्रामीण रायपुर क्षेत्र के 40 मामले शामिल हैं। हालांकि, पुलिस के मुताबिक इन 132 मामलों का मतलब यह नहीं है कि 24 घंटे में 132 लोगों का अपहरण हुआ है।
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, ये वे मामले हैं जिनमें लोग पहले से लापता थे और उनके संबंध में पहले गुम इंसान की शिकायत दर्ज थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मई-जून में लापता हुए और अब तक नहीं मिले लोगों के मामलों को अपहरण के रूप में दर्ज कर उनकी नए सिरे से तलाश शुरू की गई है।
132 मामलों में 92 कमिश्नरेट और 40 ग्रामीण क्षेत्र के
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 घंटे में दर्ज किए गए 132 मामलों में:
- रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र – 92 मामले
- ग्रामीण रायपुर क्षेत्र – 40 मामले
- कुल – 132 मामले
ये मामले रायपुर जिले के 32 पुलिस थानों में दर्ज किए गए हैं। रायपुर जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार जिले में कुल 32 पुलिस स्टेशन हैं।
क्यों दर्ज किए गए इतने अपहरण के केस?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पहले किसी बालिग व्यक्ति के लापता होने पर सामान्य तौर पर गुम इंसान की शिकायत दर्ज की जाती थी, जबकि नाबालिग के लापता होने के मामलों में अपहरण की एफआईआर दर्ज कर जांच की जाती थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लापता लोगों की तलाश को अधिक गंभीरता से लेने के लिए मामलों को अपहरण के रूप में दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक 5 मई से लापता लोगों के मामलों में भी अपहरण का केस दर्ज कर गंभीरता से तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं।
यानी 132 का आंकड़ा एक दिन में हुए अपहरण की घटनाओं का आंकड़ा नहीं है, बल्कि पहले से लंबित लापता मामलों को नए सिरे से एफआईआर के रूप में दर्ज किए जाने का परिणाम है।
कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने क्या कहा?
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के मुताबिक कोर्ट के निर्देश के बाद मई-जून में लापता हुए लोगों के मामलों में अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई है। अब इन सभी मामलों में पुलिस उनकी नए सिरे से तलाश कर रही है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता मिले और जांच सिर्फ गुमशुदगी की शिकायत तक सीमित न रहे।
मुजगहन में सबसे ज्यादा 16 मामले
32 थानों में दर्ज मामलों में कुछ थानों में संख्या काफी अधिक रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
| थाना | दर्ज मामले |
|---|---|
| मुजगहन | 16 |
| गुढियारी | 13 |
| खमतराई | 11 |
| उरला | 10 |
| टिकरापारा | 9 |
| खरोरा | 7 |
| तिल्दा-नेवरा | 5 |
| धरसींवा | 4 |
इनमें मुजगहन थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा 16 मामले दर्ज किए गए।
राज्य में हजारों लोग अब भी लापता
लापता लोगों से जुड़े मामलों का आंकड़ा भी इस पूरी कार्रवाई की गंभीरता को समझने में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 2021 से अप्रैल 2026 तक छत्तीसगढ़ में 1,03,766 लोग लापता हुए। इनमें से पुलिस ने 87,035 लोगों को तलाश लिया, जबकि 16,731 लोग अब तक नहीं मिल पाए हैं।
इसी पृष्ठभूमि में लापता लोगों की तलाश को लेकर पुलिस की कार्रवाई को तेज करने और लंबित मामलों को नए सिरे से जांचने पर जोर दिया जा रहा है।
बच्चों के मामलों में भी तत्काल कार्रवाई पर जोर
लापता बच्चों के मामलों में पुलिस को शुरुआत से ही गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में अपहरण या मानव तस्करी जैसी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुलिस का जोर इस बात पर है कि लापता व्यक्ति की सूचना मिलने के शुरुआती घंटों में ही तलाश शुरू हो, क्योंकि शुरुआती समय में पुलिस कार्रवाई से व्यक्ति का पता लगाने की संभावना अधिक रहती है।
‘ऑपरेशन तलाश’ और ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत भी कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस लापता लोगों और बच्चों को तलाशने के लिए विशेष अभियानों के तहत भी कार्रवाई कर रही है। इस वर्ष अप्रैल में ऑपरेशन तलाश और ऑपरेशन मुस्कान के तहत 4,056 लोगों को खोजे जाने की जानकारी सामने आई थी, जिनमें 545 बच्चे और 3,511 महिला-पुरुष शामिल थे।
एक वास्तविक अपहरण के मामले में भी पुलिस को मिली सफलता
इसी अवधि में रायपुर पुलिस ने एक वास्तविक अपहरण के मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए कारोबारी प्रतीक राय को उत्तर प्रदेश से बरामद किया था। पुलिस ने सीसीटीवी और तकनीकी सर्विलांस की मदद से वाहन की लोकेशन ट्रेस की और उत्तर प्रदेश पुलिस के सहयोग से तीन आरोपियों को पकड़ा।
132 मामलों को लेकर क्या समझना जरूरी है?
रायपुर में 24 घंटे में 132 अपहरण के मामले दर्ज होने का आंकड़ा पहली नजर में चौंकाने वाला है, लेकिन पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ये 132 नई अपहरण की घटनाएं नहीं हैं।
दरअसल, पहले से लापता चल रहे लोगों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई है। अब पुलिस इन मामलों की नए सिरे से जांच और तलाश करेगी। इसका उद्देश्य लापता लोगों को जल्द से जल्द खोजकर उनके परिवारों तक पहुंचाना है।