‘चावल नहीं आया, पैसे लेने हैं तो ले जाओ’… रायपुर में राशन दुकानों पर अनियमितता के आरोप, गरीबों के हक पर उठे सवाल

Ration Scam:रायपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित कुछ राशन दुकानों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हितग्राहियों का आरोप है कि कुछ दुकानदार उन्हें निर्धारित चावल देने के बजाय नकद पैसे लेने के लिए कह रहे हैं। शिकायतों के मुताबिक, कहीं पूरा राशन नहीं दिया जा रहा तो कहीं कुछ महीनों के राशन के बदले नकद रकम देने की बात कही जा रही है।
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले खाद्यान्न के वितरण में गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है।
‘चावल नहीं है, पैसा लेना है तो ले जाओ’
हितग्राहियों के मुताबिक, कुछ राशन दुकानों पर दुकानदारों की ओर से कथित तौर पर कहा जा रहा है कि“चावल नहीं मिलेगा, पैसा लेना हो तो ले लो।”
लोगों का कहना है कि वे अपने राशन कार्ड के अनुसार निर्धारित मात्रा में चावल लेने दुकान पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अनाज देने के बजाय नकद लेने का विकल्प दिया जा रहा है।
हितग्राहियों के इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन दुकानों पर नियमों का उल्लंघन हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
चावल के बदले तय ‘रेट’ देने का आरोप
स्थानीय लोगों ने कुछ राशन दुकान संचालकों पर आपसी तालमेल से चावल के बदले एक तय रकम देने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि बाजार में करीब30 से 35 रुपए प्रति किलोकीमत वाले चावल के बदले हितग्राहियों को लगभग20 रुपए प्रति किलोके हिसाब से नकद रकम देने की बात कही जाती है।
कुछ हितग्राहियों ने यह भी आरोप लगाया है कि तीन महीने के राशन में से दो महीने का चावल दिया जाता है, जबकि तीसरे महीने के राशन के बदले नकद राशि देने की पेशकश की जाती है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
पूरा राशन मांगने पर दबाव का आरोप
हितग्राहियों का कहना है कि जब वे अपने कार्ड के अनुसार पूरा राशन मांगते हैं तो उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जाता है या राशन देने से इनकार कर दिया जाता है।
लोगों के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी राशन बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में अनाज के बजाय नकद लेने का दबाव होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों नेजिला प्रशासन और खाद्य विभागसे निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि संबंधित राशन दुकानों के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, वितरण की एंट्री और हितग्राहियों की शिकायतों की जांच की जानी चाहिए।
यदि जांच में राशन वितरण में अनियमितता या हितग्राहियों के हक का खाद्यान्न रोकने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।
फिलहाल, सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन या खाद्य विभाग की आधिकारिक जांच और संबंधित राशन दुकान संचालकों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
