Use of violence to stop women from moving forward – Rahul Gandhi राहुल गांधी बोले- महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल, 80% महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं

पुणे। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर बड़ा बयान दिया है। पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अलग-अलग तरीकों से हिंसा और दबाव का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं।
राहुल गांधी ने महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उनसे अपने लिए आवाज उठाने और खुद पर भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी पहचान और अपने सपनों के लिए खुद खड़ा होना चाहिए।
हिंसा के तीन रूप बताए
राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को तीन रूपों में बांटते हुए शारीरिक हिंसा, अवसरों से वंचित करना और आर्थिक हिंसा का उल्लेख किया। उनके अनुसार, महिलाओं को सुरक्षा या सामाजिक दबाव के नाम पर शिक्षा और रोजगार के अवसरों से दूर रखना भी हिंसा का एक रूप है।
उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में महिलाओं को अकेले बाहर जाने, शिक्षा हासिल करने या नौकरी करने के लिए परिवार की अनुमति की जरूरत पड़ती है। उन्होंने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और कार्यस्थल पर समान अवसर का मुद्दा भी उठाया।
‘महिलाओं को अपने लिए आवाज उठानी चाहिए’
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए खुद आवाज उठानी होगी। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे डर के कारण अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं को सीमित न करें और खुद पर विश्वास रखें।
उनके मुताबिक, महिलाओं की अपनी अलग पहचान, सोच, सपने और क्षमताएं हैं। समाज को महिलाओं को किसी रिश्ते या सामाजिक भूमिका तक सीमित करने के बजाय उनकी स्वतंत्र पहचान को स्वीकार करना चाहिए।
महिलाओं के अनुभवों पर भी हुई चर्चा
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी महिलाओं से उनके अनुभव, संघर्ष, सपनों और रोजमर्रा की चुनौतियों को खुलकर साझा करने की अपील कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने महिलाओं से यह बताने को कहा था कि उनके लिए ‘भारतीय महिला’ होने का क्या मतलब है और समाज उनके साथ किस तरह व्यवहार करता है।
पुणे के कार्यक्रम में छात्राओं ने यौन उत्पीड़न, व्यक्तिगत सुरक्षा, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन और शिक्षा से जुड़ी आर्थिक परेशानियों जैसे मुद्दे भी उठाए।
महिलाओं की स्वतंत्रता पर जोर
राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर कहा कि उनकी पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि महिलाओं को अपनी जिंदगी, शिक्षा, करियर और भविष्य को लेकर खुद निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।
राहुल गांधी के इस बयान ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता, सामाजिक दबाव और समान अवसर को लेकर बहस को चर्चा में ला दिया है।
