Rahul Gandhi Manusmriti: मनुस्मृति में महिलाओं के बारे में क्या लिखा? कितना सही है राहुल गांधी का दावा

नई दिल्ली/पुणे। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर बात करते हुए मनुस्मृति का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि मनुस्मृति के अनुसार महिला बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद बेटों के अधीन रहती है तथा उसे कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि राहुल गांधी का दावा मनुस्मृति के मूल पाठ से कितना मेल खाता है? उपलब्ध अनुवादों और श्लोकों की जांच करने पर तस्वीर कुछ अधिक जटिल नजर आती है।
मनुस्मृति के श्लोक 9.3 में क्या लिखा है?
राहुल गांधी ने जिस बात का उल्लेख किया, उसका सीधा संबंध मनुस्मृति के अध्याय 9 के श्लोक 3 से बताया जाता है। उपलब्ध अनुवादों के अनुसार इस श्लोक में महिला के जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति और पुत्र की देखरेख/अधिकार में रहने की बात कही गई है और महिला के स्वतंत्र रूप से रहने को स्वीकार नहीं किया गया है। इसलिए राहुल गांधी द्वारा बताए गए पिता-पति-पुत्र वाले क्रम का आधार मनुस्मृति में मौजूद है।
हालांकि, इसे पूरे ग्रंथ की महिलाओं के बारे में एकमात्र धारणा बताना सही तस्वीर नहीं होगी।
मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान की भी बात
मनुस्मृति के अध्याय 3 में महिलाओं के सम्मान को लेकर भी स्पष्ट श्लोक मिलते हैं। श्लोक 3.56 में कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवताओं के प्रसन्न होने की बात कही गई है और जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां धार्मिक कर्मों के निष्फल होने की बात कही गई है।
अगले श्लोकों में भी परिवार में महिलाओं की स्थिति और उनके सुख-दुख को परिवार की समृद्धि से जोड़ा गया है।
तो राहुल गांधी का दावा कितना सही?
फैक्ट-चेक का निष्कर्ष: राहुल गांधी ने मनुस्मृति के एक वास्तविक प्रावधान का उल्लेख किया है। विशेष रूप से महिला के पिता, पति और पुत्र की देखरेख में रहने तथा स्वतंत्र न रहने संबंधी विचार मनुस्मृति के संबंधित श्लोकों में मिलता है।
लेकिन पूरी मनुस्मृति को केवल इसी एक विचार से परिभाषित करना अधूरा होगा, क्योंकि इसी ग्रंथ में महिलाओं के सम्मान और परिवार में उनके महत्व को रेखांकित करने वाले श्लोक भी मौजूद हैं। इसलिए राहुल गांधी के बयान को एक खास श्लोक के संदर्भ में सही, लेकिन पूरे ग्रंथ की व्यापक तस्वीर के रूप में अधूरा कहा जा सकता है।
महिलाओं की स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस
राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि महिलाओं की पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए उनके स्वतंत्र होकर अपने लिए खड़े होने और खुद पर विश्वास करने की बात कही।
मनुस्मृति को लेकर उनका बयान ऐसे समय में आया है जब महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार जारी है। इस बयान ने एक बार फिर प्राचीन ग्रंथों की व्याख्या और आधुनिक समानता के विचारों के बीच संबंध पर चर्चा तेज कर दी है।
