Nepal Flood: 157 मौतें, सैकड़ों लापता… ग्लेशियर-मलबे से बनी झील फटी तो आया मौत का सैलाब

काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और आसपास के इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।
इस आपदा की वजह को लेकर शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। अधिकारियों और वैज्ञानिकों के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का भारी मलबा नदी में गिरा, जिससे नदी का रास्ता अवरुद्ध हुआ और एक अस्थायी झील जैसी स्थिति बन गई। इसके बाद यह प्राकृतिक रुकावट टूट गई और पानी, बर्फ तथा मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आ गया।
कैसे आया अचानक मौत का सैलाब?
भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक पानी और मलबे का बेहद तेज बहाव आया। शुरुआती तकनीकी आकलन के मुताबिक, तिब्बत की ओर नदी में बनी एक रुकावट के पीछे पानी जमा हो गया था। बाद में यह अस्थायी प्राकृतिक बांध टूट गया और भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह निकला। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के प्रमुख बिनोद पराजुली के मुताबिक, चीनी अधिकारियों से मिली सैटेलाइट तस्वीरों में मितेरी पुल से करीब 20 किलोमीटर ऊपर नदी में मलबे से बनी रुकावट दिखाई दी। इसके पीछे पानी जमा होकर अस्थायी झील बनी और फिर उसके टूटने से अचानक बाढ़ आई।
Satellite तस्वीरों में दिखी तबाही
सैटेलाइट तस्वीरों ने इस प्राकृतिक आपदा के असर को साफ तौर पर दिखाया है। तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद के इलाके की तुलना करने पर पहाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव दिखाई देता है। भारत के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में भी ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और पहाड़ी भूभाग में बड़ी हलचल, भोटेकोशी नदी में बढ़ा हुआ बहाव और नदी के किनारे बड़े पैमाने पर जलभराव दिखाई दिया है।

ग्लेशियर टूटा या मलबे से बनी झील फटी?
आपदा की शुरुआती जांच में अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं। वैज्ञानिकों और नेपाली अधिकारियों ने आइस एवलॉन्च यानी बर्फ के बड़े हिस्से के गिरने, उसके साथ चट्टानों और मलबे के आने तथा नदी में अस्थायी रुकावट बनने की संभावना जताई है। कुछ शुरुआती आकलन इसे ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ की घटना से भी जोड़ रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि घटना की पूरी वैज्ञानिक तस्वीर सामने आने के बाद ही यह निश्चित रूप से कहा जा सकेगा कि मुख्य ट्रिगर ग्लेशियर झील का फटना था या बर्फ-मलबे से बनी नदी की रुकावट का टूटना।
मलबे ने बाढ़ को बनाया और ज्यादा खतरनाक
इस आपदा में सिर्फ पानी ही विनाश का कारण नहीं था। पानी के साथ बड़ी मात्रा में चट्टान, बर्फ और मिट्टी का मलबा नीचे की ओर आया। इसी वजह से बाढ़ का बहाव बेहद भारी और विनाशकारी हो गया। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि केवल पानी का बहाव होता तो नुकसान का स्तर इतना बड़ा नहीं होता। लेकिन मलबे के पानी में शामिल होने से नदी का प्रवाह बेहद ताकतवर हो गया और रास्ते में आने वाली संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा।
घर, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह
बाढ़ ने नदी के किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही मचाई। कई बस्तियां प्रभावित हुईं और सड़कें तथा पुल बह गए। जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्टों के मुताबिक रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। बाढ़ का असर आगे धादिंग और नुवाकोट सहित अन्य जिलों तक भी पहुंचा।
157 लोगों की मौत, राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार 157 शव बरामद किए जा चुके हैं। कई लोग अभी भी लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना और अन्य बचाव दल हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। सरकार ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, घायलों का इलाज कराने और लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने भी राहत, बचाव और खोज अभियान को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
क्या होता है GLOF?
GLOF यानी Glacial Lake Outburst Flood उस स्थिति को कहा जाता है जब ग्लेशियर के पास या उसके ऊपर बनी झील अचानक टूट जाती है और उसमें जमा पानी बहुत तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। ऐसी बाढ़ सामान्य नदी की बाढ़ से काफी अलग होती है। इसमें कम समय में बड़ी मात्रा में पानी के साथ बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आ सकता है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और अस्थिर पहाड़ी भूभाग के कारण ऐसी घटनाओं का जोखिम चिंता का विषय बना हुआ है।
नेपाल की इस घटना में GLOF की संभावना की जांच की जा रही है, लेकिन उपलब्ध शुरुआती तकनीकी रिपोर्टें बर्फ-मलबे से बनी नदी की रुकावट और उसके टूटने को भी प्रमुख कारण बता रही हैं। इसलिए अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष आने तक इसे केवल ग्लेशियर झील फटने की घटना कहना सही नहीं होगा।

हिमालय में बढ़ रहा है आपदाओं का खतरा
नेपाल की यह घटना एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं के खतरे को सामने लाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ और ग्लेशियरों की स्थिति में बदलाव तथा भारी बारिश जैसी घटनाएं नदी घाटियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। भोटेकोशी की इस त्रासदी में सैटेलाइट तस्वीरों और शुरुआती तकनीकी विश्लेषण ने यह समझने में मदद की है कि ऊंचाई वाले इलाके में हुई एक घटना किस तरह कुछ ही समय में नीचे बसे क्षेत्रों के लिए विनाशकारी बाढ़ में बदल सकती है।
