Kashmiri Pandit Threat Letter: ‘तुम्हारे हर कदम पर नजर’… कश्मीरी पंडितों को धमकी, 6 कर्मचारियों के नाम-फोन नंबर जारी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से एक कथित धमकी पत्र सामने आया है, जिसमें कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्र में छह कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं।
धमकी सामने आने के बाद घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। कुछ कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर घर से काम करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई।
ULC के नाम से जारी हुआ कथित धमकी पत्र
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पत्र 7 अगस्त को सामने आया था। इसमें कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के अलावा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, पुलिस महानिदेशक और केंद्र सरकार से जुड़े अधिकारियों को भी धमकी दी गई है।
पत्र में दावा किया गया है कि संगठन के पास संबंधित कर्मचारियों और उनके परिवारों की जानकारी मौजूद है। कथित तौर पर यह भी चेतावनी दी गई है कि जम्मू जाने पर भी संबंधित लोग सुरक्षित नहीं रहेंगे।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां इस संचार की विश्वसनीयता, इसके स्रोत और इसके पीछे मौजूद नेटवर्क की जांच कर रही हैं। पुलिस ने भी कथित धमकी पत्र की जांच शुरू किए जाने की बात कही है।
छह कर्मचारियों की जानकारी सार्वजनिक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित हिट-लिस्ट में कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और संपर्क नंबर शामिल हैं। सुरक्षा कारणों से प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इन कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक किए जाने को लेकर कश्मीरी पंडित संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका सवाल है कि कर्मचारियों की निजी जानकारी बाहर कैसे पहुंची और क्या यह किसी सुरक्षा या गोपनीयता संबंधी चूक का परिणाम है।
क्या है ULC और LeT कनेक्शन?
ULC को भारतीय खुफिया सूत्रों द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा एक फ्रंट या शैडो ग्रुप बताया गया है। हालांकि, इस संगठन की वास्तविक संरचना और ताजा धमकी के पीछे इसके नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी है।
धमकी पत्र में प्रशासन और सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाने की बात सामने आई है। इसमें सरकारी विभागों में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर विशेष चेतावनी दी गई है।
साइकोलॉजिकल वॉर की आशंका
सुरक्षा विशेषज्ञों और कश्मीरी पंडित संगठनों की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करना केवल धमकी नहीं, बल्कि मानसिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है।
पानुन कश्मीर ने मांग की है कि सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाएं कि कथित हमलावरों के पास वास्तव में कर्मचारियों की निजी जानकारी कैसे पहुंची और क्या किसी तरह की निगरानी, प्रोफाइलिंग या जानकारी लीक हुई है।
कर्मचारियों को घर से काम की सलाह
धमकी के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कश्मीर घाटी में तैनात कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कार्यालय न आने और घर से काम करने की सलाह दी गई। साथ ही पंडित कर्मचारियों के रहने वाले इलाकों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई गई है।
रिपोर्ट्स में अलग-अलग तारीखों तक वर्क-फ्रॉम-होम की सलाह का उल्लेख है, इसलिए इसे सभी कर्मचारियों पर लागू एक समान आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर फिर चिंता
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिली ताजा धमकी ने घाटी में पुनर्वास और सुरक्षित वापसी को लेकर पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। समुदाय से जुड़े संगठनों का कहना है कि अगर लौटकर काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक होकर उन्हें धमकियां मिलती हैं, तो इससे उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां कथित धमकी पत्र की विश्वसनीयता, डिजिटल स्रोत और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि धमकी के पीछे कौन है और सार्वजनिक की गई व्यक्तिगत जानकारी का स्रोत क्या था।
