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छत्तीसगढ़ का पारंपरिक पोला (पोरा) त्योहार किसानों, बैलों और कृषि संस्कृति से जुड़ा खास पर्व है। जानें इसका इतिहास, महत्व और उत्सव की खास परंपराएं।

chhattisgarh pola festival
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पोला, जिसे छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर पोरा तिहार भी कहा जाता है, यह त्योहार विशेष रूप सेमहाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेशमें मनाया जाता है, किसानों और पशुधन को समर्पित एक महत्वपूर्ण लोकपर्व है। यह त्योहार मुख्य रूप सेभाद्रपद मास की अमावस्याके अवसर पर मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ की कृषि प्रधान संस्कृति में बैलों का विशेष महत्व है, क्योंकि वे खेतों की जुताई और कृषि कार्यों में किसानों के सहयोगी रहे हैं। इसलिए पोला के दिन किसान अपने बैलों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

छत्तीसगढ़ में पोला की प्रमुख परंपराएँ

  • बैल पूजा:पोला के दिन बैलों को काम से आराम दिया जाता है। उन्हें नहलाकर साफ किया जाता है और विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है।
  • बैल सजाने की परंपरा:बैलों के सींगों पर रंग लगाया जाता है और उनके गले में घंटियाँ, फूलों की माला तथा रंग-बिरंगी सजावट की जाती है। उन्हें सुंदर कपड़ों और झूल से भी सजाया जाता है।
  • पारंपरिक पकवान:इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के घरों मेंठेठरी, खुरमी, चौसेला, गुलगुला भजियाजैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। परिवार और पड़ोसी मिलकर त्योहार की खुशियाँ मनाते हैं।
  • मिट्टी के बैल और नंदी:बच्चों के लिए मिट्टी से बने छोटे-छोटे बैल और नंदी विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। बच्चे इन खिलौनों को सजाते हैं और उनकी पूजा करते हैं।
  • कृषि उपकरणों का सम्मान:कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेती में उपयोग होने वाले औजारों और कृषि उपकरणों की भी साफ-सफाई करके पूजा की जाती है।
  • गाँव का उत्सव:पोला के अवसर पर गाँवों में उत्साह और उमंग का वातावरण रहता है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएँ देते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेते हैं।

पोला तिहार का महत्व

छत्तीसगढ़ का पोला केवल एक त्योहार नहीं, बल्किकिसान, बैल और कृषि के बीच के आत्मीय संबंध का प्रतीकहै। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि खेती में पशुधन का कितना महत्वपूर्ण योगदान है। बैलों के प्रति सम्मान और उनकी सेवा के माध्यम से यह त्योहारकृतज्ञता, प्रकृति-प्रेम और ग्रामीण संस्कृतिका संदेश देता है।

छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं में पोला तिहार आज भी उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और यह प्रदेश की समृद्ध कृषि एवं लोकसंस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत करता है।

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