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Addiction Recovery विनोद कांबली: 14 पारियों में 1000 रन बनाने वाले बल्लेबाज की जिंदगी की दूसरी पारी, जहां हर वापसी मायने रखती है

Addiction Recovery
Addiction Recovery

मुंबई: क्रिकेट में कुछ आंकड़े सिर्फ रिकॉर्ड नहीं होते, वे उम्मीद बन जाते हैं। विनोद कांबली के नाम ऐसा ही एक आंकड़ा है—टेस्ट क्रिकेट की सिर्फ 14 पारियों में 1,000 रन। लेकिन उनकी जिंदगी में एक और संख्या है, जो क्रिकेट के स्कोरकार्ड पर नहीं मिलती। उनकी पत्नी एंड्रिया हेविट के मुताबिक, कांबली कम से कम 14 बार रिहैबिलिटेशन से गुजर चुके हैं।

एक संख्या ने उन्हें क्रिकेट की दुनिया में पहचान दी थी। दूसरी संख्या उनकी जिंदगी की लंबी लड़ाई बताती है। और अब, 27 सितंबर 2026 को ठाणे के एक केयर सेंटर से सामने आए वीडियो में कांबली फिर कैमरे के सामने हैं। बोलने में उन्हें परेशानी हो रही है। शब्दों के बीच ठहराव है। लेकिन संदेश साफ है—इलाज चल रहा है।

वह वहां मिल रहे प्यार की बात करते हैं। सेंटर की साफ-सफाई की तारीफ करते हैं। कहते हैं कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि वह अपने घर से दूर हैं। यह किसी क्रिकेट पारी का स्कोर नहीं है। यह जिंदगी की पारी का एक छोटा-सा अपडेट है।

एक चाल से शिवाजी पार्क तक

कांबली की कहानी मुंबई के उस क्रिकेट से शुरू होती है, जहां सपने अक्सर बहुत छोटी जगहों से निकलते हैं। उनका बचपन कांजुरमार्ग की एक चाल में बीता। पिता गणपत कांबली मैकेनिक थे। बेटा क्रिकेट का किट लेकर लोकल ट्रेन से शिवाजी पार्क पहुंचता था। वहीं रमाकांत आचरेकर खिलाड़ियों को तैयार करते थे। और उसी मैदान पर एक दूसरा बच्चा भी आता था। सचिन तेंदुलकर।

1988 में Harris Shield के एक स्कूल मैच में दोनों ने मिलकर 664 रन की नाबाद साझेदारी की। BCCI के रिकॉर्ड के मुताबिक, सचिन ने 326 और कांबली ने 349 रन बनाए थे। दोनों तब किशोर थे। (bcci.tv) उस दिन सिर्फ एक साझेदारी नहीं बनी थी। दो नाम पहली बार बड़े पैमाने पर साथ पढ़े गए थे। सचिन और विनोद।

रिकॉर्ड इतनी तेजी से आए कि उम्र छोटी पड़ गई

कांबली का अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू हुआ तो उनकी बल्लेबाजी ने उम्मीदों को और बड़ा कर दिया। उन्होंने सिर्फ 14 टेस्ट पारियों में 1,000 रन पूरे किए। यह उपलब्धि हासिल करने वाले बल्लेबाजों की सूची में वह आज भी सबसे तेज भारतीयों में हैं। (icc-cricket.com) उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में चार शतक लगाए। इनमें लगातार दो टेस्ट में दोहरे शतक भी शामिल थे।

एक युवा बल्लेबाज के लिए इससे बड़ा परिचय क्या होता? रिकॉर्ड कह रहे थे कि सामने एक असाधारण प्रतिभा है। लेकिन क्रिकेट में प्रतिभा और लंबा करियर हमेशा एक ही रास्ते पर नहीं चलते। कांबली का अंतरराष्ट्रीय करियर 1990 के दशक के अंत तक पहुंचते-पहुंचते खत्म हो गया।

1996: ईडन गार्डन्स की वह तस्वीर

फिर आया 1996 का विश्व कप। कोलकाता का ईडन गार्डन्स। भारत और श्रीलंका के बीच सेमीफाइनल। भारत की पारी के दौरान स्टेडियम में हंगामा हुआ। दर्शकों ने चीजें मैदान में फेंकीं, आगजनी हुई और मैच रोकना पड़ा। कांबली 10 रन पर नाबाद थे। भारत हार चुका था। और वह युवा बल्लेबाज मैदान से बाहर निकलते हुए रो रहा था। उस तस्वीर में एक अजीब विरोधाभास था। वह आउट नहीं हुआ था। फिर भी उसकी पारी खत्म हो गई थी।

आज पीछे मुड़कर देखने पर वह तस्वीर सिर्फ उस मैच की नहीं लगती। लेकिन उस तस्वीर को उनकी आगे की जिंदगी का प्रतीक मानना एक भावनात्मक व्याख्या होगी, तथ्य नहीं। तथ्य इतना है कि भारत वह मैच हार गया और कांबली की आंखों में आंसू थे।

क्रिकेट से दूर होने के बाद भी तलाश जारी रही

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी के बाद कांबली ने खुद को दूसरे रास्तों में आजमाया। टेलीविजन, मनोरंजन और राजनीति—उन्होंने कई जगह कदम रखा। सचिन तेंदुलकर के साथ उनके रिश्ते को लेकर भी सार्वजनिक मतभेद सामने आए। एक दौर में कांबली ने सचिन से मिली मदद को लेकर नाराजगी जताई। लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं हुई। 2013 में सचिन के आखिरी टेस्ट के समय कांबली ने सार्वजनिक रूप से अपनी भावनाएं जाहिर कीं। बाद के वर्षों में दोनों फिर मिले।

और 2024 में कांबली ने खुद स्वीकार किया कि जिस समय उन्हें लगा था कि सचिन ने उनकी मदद नहीं की, उस समय वह बहुत निराश और परेशान थे। उन्होंने यह भी कहा कि सचिन ने उनके लिए बहुत कुछ किया। कभी साथ क्रिकेट सीखने वाले दो बच्चों की कहानी में दूरी आई, लेकिन रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

दिल का दौरा और फिर स्वास्थ्य की लंबी लड़ाई

2013 में कांबली को दिल का दौरा पड़ा था और उनका इलाज हुआ। दिसंबर 2024 में उनकी सेहत फिर गंभीर चिंता का विषय बनी। उन्हें ठाणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनके मस्तिष्क में खून के थक्के पाए गए। करीब दो सप्ताह के उपचार के बाद 1 जनवरी 2025 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली। (indiatoday.in)

अस्पताल से निकलते समय कांबली ने कैमरे के सामने शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील की। जिस आदमी की अपनी जिंदगी नशे की समस्या से प्रभावित रही थी, वही दूसरों को उससे बचने की सलाह दे रहा था। उस वक्त उनकी बात में क्रिकेटर की आवाज से ज्यादा एक ऐसे व्यक्ति की आवाज थी, जिसने उसकी कीमत देखी थी।

14 बार रिहैब की कहानी

कांबली की शराब की समस्या को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक जानकारी उनकी पत्नी एंड्रिया हेविट के बयान से आती है। 2025 में दिए एक इंटरव्यू/पॉडकास्ट में एंड्रिया ने बताया कि कांबली कम से कम 14 बार रिहैब जा चुके हैं। (timesofindia.indiatimes.com)

इस संख्या को सिर्फ “14 असफलताएं” मान लेना शायद addiction recovery की पूरी तस्वीर नहीं बताता। अमेरिका का National Institute on Alcohol Abuse and Alcoholism यानी NIAAA कहता है कि recovery के दौरान relapse हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि उपचार पूरी तरह विफल हो गया। जरूरत पड़ने पर treatment plan को बदला या अधिक गहन किया जा सकता है। (alcoholtreatment.niaaa.nih.gov)

यानी कभी-कभी इलाज की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण संख्या यह नहीं होती कि कोई कितनी बार गिरा। बल्कि यह होती है कि वह कितनी बार फिर इलाज तक पहुंचा।

“परिवार ने छोड़ दिया”—इस दावे की तस्वीर अलग है

कांबली के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया गया कि परिवार ने उन्हें छोड़ दिया। उपलब्ध सार्वजनिक बयानों में इसकी पुष्टि नहीं होती। इसके उलट, उनकी पत्नी एंड्रिया ने 2025 में अपने रिश्ते और कांबली की देखभाल को लेकर विस्तार से बात की थी। उन्होंने बताया था कि उन्होंने 2023 में तलाक के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में उसे आगे नहीं बढ़ाया। (timesofindia.indiatimes.com)

कांबली के भाई वीरेंद्र ने भी 2025 में उनके स्वास्थ्य के बारे में बताया था। उनके मुताबिक कांबली घर पर थे, इलाज चल रहा था और बोलने में परेशानी थी। (indiatoday.in) इसलिए कांबली की कहानी को “परिवार ने छोड़ दिया” जैसी एक लाइन में समेटना उपलब्ध तथ्यों के साथ न्याय नहीं करता।

भारत में शराब की लत की बड़ी तस्वीर

कांबली की कहानी व्यक्तिगत है, लेकिन जिस समस्या से वह जूझते रहे हैं, वह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 2019 में AIIMS के National Drug Dependence Treatment Centre की राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक भारत में करीब 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते थे। इनमें 5.7 करोड़ से अधिक लोग harmful या dependent alcohol use से प्रभावित थे और उन्हें मदद की जरूरत थी।

रिपोर्ट का एक आंकड़ा खास तौर पर परेशान करने वाला था—alcohol dependence वाले लगभग 38 लोगों में सिर्फ एक को कोई treatment मिलने की सूचना थी। (pib.gov.in) यानी समस्या सिर्फ नशे की नहीं है। समस्या इलाज तक पहुंच की भी है। और कई घरों में समस्या का नाम लेने की भी।

ठाणे से आया नया वीडियो

अब 27 सितंबर 2026 पर लौटिए। ठाणे के Nidan Centre for Elderly Care से सामने आए वीडियो में कांबली कैमरे के सामने हैं। उनकी आवाज में पहले जैसी रवानी नहीं है। बोलने में उन्हें परेशानी होती है। लेकिन वह बात करते हैं। वह बताते हैं कि उनका इलाज चल रहा है। वह सेंटर में मिल रहे प्यार की बात करते हैं। वह वहां की साफ-सफाई की तारीफ करते हैं। और सबसे महत्वपूर्ण बात—वह अपने इलाज को लेकर भरोसा जताते हैं।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, वह इस सेंटर में उपचार और देखभाल ले रहे हैं। सेंटर से जुड़े लोगों ने भी उनकी स्थिति और वहां मिल रही देखभाल के बारे में जानकारी दी है। (indiatoday.in) यहां कोई क्रिकेट स्कोर नहीं है। कोई शतक नहीं है। कोई रिकॉर्ड नहीं है। सिर्फ एक आदमी है, जो कैमरे के सामने बैठकर कह रहा है कि उसका इलाज चल रहा है।

पहली पारी में रिकॉर्ड, दूसरी पारी में रिकवरी

विनोद कांबली की पहली पारी बहुत तेज थी। 14 टेस्ट पारियां और 1,000 रन। 349 रन की स्कूल साझेदारी। चार टेस्ट शतक। दो लगातार दोहरे शतक। लेकिन जिंदगी की दूसरी पारी अलग होती है। यहां रन नहीं गिने जाते। यहां हर दिन मायने रखता है। हर इलाज मायने रखता है। हर बार मदद मांगना मायने रखता है। हर बार वापस लौटना मायने रखता है।

कांबली की कहानी को सिर्फ एक ऐसे क्रिकेटर की कहानी के रूप में पढ़ना आसान है, जिसने अपनी प्रतिभा के मुताबिक लंबा करियर नहीं बनाया। लेकिन आज की तस्वीर उससे बड़ी है। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसकी जिंदगी में स्वास्थ्य संकट आए, addiction से जूझना पड़ा, कई बार rehabilitation की जरूरत पड़ी और फिर भी इलाज का रास्ता बंद नहीं हुआ। 27 सितंबर का वह वीडियो इसी वजह से महत्वपूर्ण है। क्योंकि कैमरे के सामने बैठे कांबली के पॉस बताने के लिए कोई नया रिकॉर्ड नहीं था। उनके पास सिर्फ एक खबर थी— इलाज चल रहा है।

और शायद जिंदगी की दूसरी पारी में कभी-कभी इससे बड़ी खबर कोई नहीं होती।

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