जबलपुर में मुआवजा नहीं देने पर प्रशासन पर सख्ती: कलेक्ट्रेट की संपत्ति कुर्क करने पहुंचा अमला, 6 साल से लंबित है भुगतान

जबलपुर: सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के मामले में पीड़ित परिवार को अब तक मुआवजा नहीं मिलने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। छह साल बीत जाने के बावजूद आदेश का पालन नहीं होने पर जबलपुर जिला अदालत के निर्देश पर कलेक्ट्रेट की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू करने के लिए अमला मौके पर पहुंचा। इस घटनाक्रम से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
इस खबर में एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है: उपलब्ध जानकारी में कार्रवाई का आदेश जबलपुर जिला अदालत का बताया गया है, जबकि हेडलाइन में हाईकोर्ट लिखा है। दोनों में अंतर है। इसलिए आधिकारिक आदेश की पुष्टि के बिना हाईकोर्ट का नाम प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
छह साल से मुआवजा लंबित, अब कलेक्ट्रेट की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी; अदालत के सख्त रुख से प्रशासन में हड़कंप
जबलपुर। सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत के बाद उसके परिजनों को मिलने वाली मुआवजा राशि का भुगतान छह साल बाद भी नहीं किए जाने का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय के आदेश पर कलेक्ट्रेट की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के लिए अमला मौके पर पहुंचा। इस कार्रवाई की खबर से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।
छह साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
मामला सड़क दुर्घटना में हुई एक युवक की मौत से जुड़ा है। हादसे के बाद पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का मामला अदालत पहुंचा था। न्यायालय ने मुआवजा भुगतान के संबंध में आदेश दिया, लेकिन आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद परिवार को उसकी राशि नहीं मिली।
परिवार को न्याय पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। छह साल तक भुगतान लंबित रहने के बाद अब अदालत ने वसूली की प्रक्रिया को लेकर सख्ती दिखाई है।
कुर्की की कार्रवाई के लिए पहुंचा अमला
मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर अदालत ने कलेक्ट्रेट की संपत्ति कुर्क करने से जुड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। आदेश के पालन के लिए न्यायालयीन अमला मौके पर पहुंचा। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
अदालत की इस सख्ती का संदेश साफ है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के लिए अब संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई की नौबत आ गई है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को मुआवजा देने का मामला अदालत तक पहुंच चुका था, तो भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों हुई? क्या संबंधित विभाग ने न्यायालय के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया?
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि मुआवजे के लिए पीड़ित परिवार को छह साल तक इंतजार करना पड़ा और अब अदालत को कुर्की की कार्रवाई तक पहुंचना पड़ा। आगे की कार्रवाई और प्रशासन की ओर से भुगतान को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

