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UCC: 2029 के लिए बीजेपी का बड़ा दांव? 21 राज्यों में लागू करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA के सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा।

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा UCC को अपने प्रमुख वैचारिक एजेंडे में शामिल करती रही है। ऐसे में 2029 की डेडलाइन ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

अमित शाह ने UCC को लेकर क्या कहा?

मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी।

शाह का बयान केंद्र सरकार की ओर से पूरे देश में एक साथ केंद्रीय UCC कानून लाने के बजाय फिलहाल राज्य-दर-राज्य मॉडल को आगे बढ़ाने की रणनीति की ओर भी संकेत करता है।

अभी UCC कहां तक पहुंचा?

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां UCC कानून लागू हो चुका है। राज्य ने फरवरी 2024 में कानून पारित किया था और जनवरी 2025 से इसे लागू किया गया। इसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी UCC को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी UCC को लेकर समितियां गठित की गई हैं, जो कानून का मसौदा तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं।

UCC में क्या बदल सकता है?

समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कुछ मामलों में नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसमें मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और कुछ राज्यों में लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों में तैयार किए जा रहे UCC कानूनों के प्रावधान पूरी तरह समान होना जरूरी नहीं है। स्थानीय परंपराओं और विशेष समुदायों, खासकर आदिवासी समूहों से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी अलग-अलग राज्यों में चर्चा है।

2029 से पहले UCC क्यों महत्वपूर्ण?

भाजपा के लिए UCC लंबे समय से प्रमुख वैचारिक मुद्दा रहा है। पार्टी के एजेंडे में राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और UCC जैसे मुद्दों का प्रमुख स्थान रहा है। राम मंदिर और अनुच्छेद 370 से जुड़े लक्ष्य पूरे होने के बाद UCC को भाजपा के अगले बड़े एजेंडे के रूप में देखा जाता रहा है।

इस लिहाज से 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य भाजपा के लिए सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है।

NDA के सहयोगियों की सहमति होगी बड़ी चुनौती

हालांकि, UCC के रास्ते में सिर्फ कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां ही नहीं हैं। NDA के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक JDU सहित कुछ सहयोगी दलों ने UCC पर चर्चा और स्पष्टता की जरूरत जताई है।

इसलिए भाजपा के सामने 21 राज्यों में कानून लागू कराने के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक सहमति बनाने की चुनौती भी होगी।

विपक्ष का विरोध, भाजपा का अपना तर्क

UCC को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। CPI(M) ने हालिया बयान में UCC को लेकर भाजपा की पहल को बहुसंख्यकवादी राजनीति से जोड़ते हुए विरोध की बात कही है।

वहीं भाजपा UCC को समान नागरिक अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में कदम के तौर पर पेश करती रही है।

क्या 2029 में बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा?

अमित शाह की 2029 की स्पष्ट डेडलाइन के बाद यह सवाल अहम हो गया है कि क्या UCC आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा का बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा।

अगर अगले कुछ वर्षों में अधिक NDA शासित राज्य UCC लागू करते हैं, तो 2029 तक भाजपा इसे अपने शासन और वैचारिक एजेंडे की उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है। हालांकि, कानूनों का वास्तविक स्वरूप, सहयोगी दलों की सहमति और राज्यों में राजनीतिक प्रतिक्रिया इस पूरी रणनीति की दिशा तय करेगी।

यानी 2029 से पहले UCC का विस्तार भाजपा के लिए सिर्फ कानून लागू करने की कवायद नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव की तैयारी भी माना जा रहा है।

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