mayawati-ishaan-deepika-bsp आकाश के बाद ईशान से भी मायावती ने बनाई दूरी, भतीजी दीपिका को लेकर किया बड़ा ऐलान

लखनऊ:बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने पार्टी और अपने परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा फैसला स्पष्ट कर दिया है। भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद अब दूसरे भतीजे ईशान को लेकर भी मायावती ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि परिवार के किसी भी सदस्य को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। हालांकि, भतीजी दीपिका आनंद को भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी में सहयोग करने का रास्ता खुला रखा गया है।
आकाश आनंद के खिलाफ कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि मायावती अपने दूसरे भतीजे ईशान को पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी दे सकती हैं। लेकिन मायावती के ताजा बयान ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।
परिवारवाद को लेकर मायावती का सख्त रुख
मायावती ने अपने बयान में कहा कि बसपा का मूल मिशन बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सफलता में किसी भी व्यक्ति को बाधा बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ‘बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण और उसे अपने पैरों पर खड़ा करने की है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने सगे भाई-बहनों और उनके परिवार के युवा सदस्यों को पार्टी के कार्यों तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक पदों का लाभ नहीं दिया।
आनंद कुमार के परिवार पर भी साफ किया रुख
मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के कारण अपनी देखभाल और सुरक्षा के लिए उन्हें आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा। उनके मुताबिक, आनंद कुमार लंबे समय से उनकी निगरानी में पार्टी की अहम जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
हालांकि, मायावती ने साफ किया कि आनंद कुमार के परिवार के अन्य सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ मिलना पार्टी और आंदोलन के हित में नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अब आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे या बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
दीपिका आनंद के लिए खुला रास्ता
मायावती ने अपनी भतीजी दीपिका आनंद को लेकर जरूर एक अलग संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं।
मायावती के मुताबिक, दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। आगे चलकर उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी में उन्हें जरूरत के मुताबिक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
हालांकि, मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि आनंद कुमार अपने दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों में से किसी को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे।
यदि दीपिका इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं तो पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कांशीराम की नीति का दिया हवाला
मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में बसपा को परिवारवाद से मुक्त रखना पार्टी के हित में है। उन्होंने कांशीराम की नीति का हवाला देते हुए कहा कि वह परिवारवाद के खिलाफ रहे और उनकी शिष्या होने के नाते वह भी इसी नीति पर कायम हैं।
मायावती ने कहा कि अगर वह महिला नहीं होतीं तो शायद अपने भाई-बहनों में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखतीं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी परिस्थितियों के कारण उन्हें अपने छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अब आनंद कुमार के बच्चे बड़े और शादीशुदा हो चुके हैं और इसकी वजह से उन्हें भी कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद वह किसी के मोह में पड़कर पार्टी को नुकसान नहीं होने देंगी।
संगठन और सरकार में भी परिवारवाद से दूरी
बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी संगठन में और भविष्य में सरकार बनने की स्थिति में भी किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने पर उसके परिवार के अन्य सदस्यों को उसी की आड़ में राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा।
मायावती के मुताबिक, बसपा को परिवारवाद से मुक्त रखना जरूरी है, ताकि सर्वसमाज के अधिक से अधिक लोग ‘सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति’ के आंदोलन से जुड़ सकें।
कार्यकर्ताओं से मायावती की अपील
मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं से पार्टी विरोधी दलों और संगठनों के साथ-साथ जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया के कथित प्रचार से सावधान रहने की अपील की।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें विभिन्न हथकंडों के जरिए बसपा को उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने से रोकना चाहती हैं। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरे तन, मन और धन से आंबेडकरवादी मिशन में जुटे रहें।
निष्कर्ष
मायावती के इस बयान से साफ है कि वह बसपा में परिवार के राजनीतिक विस्तार को सीमित रखने के पक्ष में हैं। आकाश आनंद और ईशान को लेकर सख्त रुख के बीच दीपिका आनंद को भविष्य में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना का संकेत जरूर दिया गया है। ऐसे में यूपी की राजनीति में मायावती के इस फैसले के राजनीतिक असर पर भी नजर रहेगी।
