‘बिहार में विकास तब मानेंगे, जब दूसरे राज्यों से लोग यहां पढ़ाई, रोजगार और इलाज के लिए आएं’: प्रशांत किशोर

पटना: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए राज्य में विकास के मौजूदा मॉडल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केवल सड़क और बिजली की व्यवस्था को विकास का पैमाना नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, वास्तविक विकास तब माना जाएगा, जब दूसरे राज्यों के लोग बिहार में पढ़ाई, रोजगार और इलाज के लिए आने लगें।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में विकास को आंकने के लिए यह देखना जरूरी है कि राज्य के लोगों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि जिस दिन बिहार के युवाओं को अपने राज्य में ही रोजगार मिलेगा और लोगों को पढ़ाई व इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा, उस दिन विकास की तस्वीर बदली हुई मानी जाएगी।
‘सड़क और बिजली विकास का पैमाना नहीं’
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में कहा कि सड़क और बिजली को विकास का अंतिम पैमाना मानना सही नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी देश में बड़ी संख्या में रेलवे लाइनें बिछाई गई थीं, लेकिन केवल रेलवे लाइन बिछ जाने को विकास नहीं कहा जा सकता।
‘बच्चों को रोजगार मिलेगा, तभी होगा विकास’
उन्होंने कहा कि असली विकास तब होगा, जब बिहार के बच्चों को अपने राज्य में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे और लोगों को शिक्षा, नौकरी तथा इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
दूसरे राज्यों से लोग बिहार आएं, तब होगा विकास
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के विकास की स्थिति को परखने का एक पैमाना यह होना चाहिए कि क्या दूसरे राज्यों के लोग बिहार में पढ़ाई, रोजगार और इलाज के लिए आ रहे हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब बिहार में ऐसे अवसर पैदा होंगे कि बाहर के लोग यहां आने लगें और बिहार के लोगों को बेहतर भविष्य के लिए पलायन न करना पड़े, तभी राज्य के वास्तविक विकास की बात कही जा सकेगी।
