दादी की शवयात्रा बनी “जश्न-ए-विदाई”

बिहार में एक ऐसी शव यात्रा निकली है कि यह चर्चा का विषय बन गया है, मामला भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के दिलमनपुर गांव का है. यहां बीते शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को 95 वर्षीय कौशल्या देवी के निधन के बाद पोतों ने उन्हें यादगार विदाई दी।
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर में 95 वर्षीय बुजुर्ग कौशल्या देवी के निधन पर उनके पोतों ने अनोखी अंतिम यात्रा निकाली, कौशल्या देवी की शवयात्रा को बारात की तरह धूमधाम से निकाला गया, 700 से ज्यादा लग्जरी गाड़ियों और 3500 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने इसे एक उत्सव में बदल दिया, यात्रा में 10 से अधिक लौंडा डांसर और 30 बैंड बाजे शामिल थे, जो डीजे की धुन पर नाचते हुए चल रहे थे, 80 से अधिक ड्रोन कैमरों से इस यात्रा को कैद किया गया।

पोतों ने अपनी दादी को “घर की छत” बताते हुए उन्हें यादगार विदाई दी, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर काफी हो रही है, यह अनोखी अंतिम यात्रा भोजपुर के शाहपुर में शुक्रवार को देखने को मिली।
हालांकि, इस तरह की भव्यता को लेकर कुछ लोग चर्चा भी करते नजर आए, लेकिन अधिसंख्या लोगों ने इसे परिवार की भावनाओं और दादी के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक बताया।

क्या अंतिम विदाई इस तरह धूमधाम से देना सही है, या इसे सादगी के साथ होना चाहिए?
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