आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने से अधिक समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन जारी था। इसके साथ ही देश के कई हिस्सों में युवाओं द्वारा भी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि किसी बड़े जनआंदोलन के बाद केंद्र सरकार के किसी मंत्री के पद छोड़ने का यह दुर्लभ मामला माना जा रहा है।
इससे पहले भी विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों के खिलाफ लगातार दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उन प्रयासों का सरकार पर कोई बड़ा राजनीतिक असर देखने को नहीं मिला था। इसी संदर्भ में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का वह चर्चित बयान भी याद किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मोदी सरकार में इस्तीफे नहीं होते।”
वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने लिखा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण पहलों को भी आगे बढ़ाया।

इस्तीफे के मुख्य कारण और घटनाक्रम
नीट पेपर लीक विवाद: NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं का भारी आक्रोश था।
जंतर-मंतर पर धरना: दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगभग एक महीने से लगातार प्रदर्शन चल रहा था, जिसमें प्रधान का इस्तीफा मुख्य मांग थी।
सरकार और सीजेपी समझौता: सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी, जिसके बाद धरना समाप्त करने की घोषणा की गई।
नया प्रभार: राष्ट्रपति भवन के बयान के अनुसार, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।
